सहर-एक नयी सुबह

कुछ बातें ऐसी भी होंती हैं जिसे आप ज़माने वालों को बताना चाहते हैं पैर कभी कभी आप कह नहीं सकते....मुझे ऐसा लगता है इस से बढ़िया तरीका कोई नहीं हो सकता है...कहीं इस से किसी का कुछ भला हो सके....
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सहर-एक नयी सुबह

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Thursday, January 21, 2010

आखिरी कविता...

वो हार लिखो वो जीत लिखो
वो ग्रीष्म लिखो वो शीत लिखो
हमलोगों के साथ गुजारे
पलों से बना वो संगीत लिखो!!

चाय की चुस्की के साथ निकली
वो हंसी का फुहार लिखो
साथ गुजारे चार सालों की
वो खुशनुमा बहार लिखो!!

लिखना है तो मेरा प्यार लिखो
हम दोस्तों का दुलार लिखो!!

वो बीते लमहों कि आपाधापी
जाने कितने ही रतजगे
न भूलें कभी, वो याद रहे
इसलिए अतीत विस्तार लिखो !!

न आना लैब मे आउटपुट का
वो सप्ली का अम्बार लिखो
जॉब न मिलने का टेन्सन
वो मन्दी का अत्याचार लिखो !!

ऐ मीत मेरे कुछ ऐसा लिखो
जो भावी पीढ़ी का सबक बने
और अंत मे गर कुछ लिखना हो
तो सबको सबका प्यार लिखो !
हाँ प्यार प्यार और प्यार लिखो !!


ये मैंने अपने कॉलेज के आखिरी दिनों में लिखा...........

1 comment:

Deepesh Kumar said...

awesome yaar..!!! feeling ko ekdam satik utara hai sabdon main.!!

i have also posted a new poem path ke saathi have a look at it..! keep posting...thanx for ur nice comment !