फूलों की वो महकती ख़ुश्बू
बारिश का वो भीगा पानी
और हवा में थी जो रवानी
क्या उस मौसम का खुमार लिखूं?
कुछ लिखना चाहता हूँ
सोचता हूँ क्या लिखूं?
थी चेहरे पर मेरी मासूमियत
आँखों में थी थोड़ी शरारत
और बातों में वो नज़ाकत
क्या अपना रंगीन मिज़ाज लिखूं?
कुछ लिखना चाहता हूँ
सोचता हूँ क्या लिखूं?
उनका आकर मुस्कुराना
जो रूठ जाऊं तो मानना
जाते जाते फिर रूलाना
क्या उनका ये अंदाज़ लिखूं?
कुछ लिखना चाहता हूँ
सोचता हूँ क्या लिखूं?
यादों में उनके आश्क़ बहाना
हर शाम एक दिया जलना
सोई उम्मीद को रोज़ जगाना
क्या उनका ये इंतज़ार-ए-बयान लिखूं?
कुछ लिखना चाहता हूँ
सोचता हूँ क्या लिखूं
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