सहर-एक नयी सुबह

कुछ बातें ऐसी भी होंती हैं जिसे आप ज़माने वालों को बताना चाहते हैं पैर कभी कभी आप कह नहीं सकते....मुझे ऐसा लगता है इस से बढ़िया तरीका कोई नहीं हो सकता है...कहीं इस से किसी का कुछ भला हो सके....
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सहर-एक नयी सुबह

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Thursday, January 21, 2010

लेखनी की मजबूरियां..

भूख लिखूंगा प्यास लिखूंगा,
जीवन को संताप लिखूंगा;
जीवन में जो खाए धोखे,
उसको क्या विश्वाश लिखूंगा?
जीवन के इस पतझड़ को,
कैसे मैं बरसात लिखूंगा?

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